चिन्ता छोड तू रब्व पे🌹

बुरा बक्त ये आआ,तुम घबराना न।

घर से बाहर भूल तुम जाना न।

जिसने दिया है जीवन, वो सम्भालेगा।

आज गिराया है उसने ,कल उठालेगा।

चिन्ता छोड तू रब्व पे,उसे भुलाना न।

बेअर्थ के आंसु तुम बहाना न ।

बुरा बक्त ये आआ,तूम घबराना न।

घर से बाहर भूम मत तूम जाना न।

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क्या लाया था क्या ये तेरा खो जाऐगा।

उस मालिक को पहचान वो तेरा हो जाऐगा।

दो बक्त की रोटी,तुझको मिल जाऐगी।

जीवन की ये रेखा लम्बी हो जाऐगी।

उसका कहर ये आआ,उसकी वो जाने।

छोड माया का तू उसका हो जाना।

बुरा बक्त ये आआ,तूम घबराना न।

घर से बाहर भूल मत तू जाना न।

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कुदरत से खिलबाड़ की ये सजा होई।

उसकी नजर से न बच पाया है कोई।

अभी थोडा गया,बहुत कुछ खोना है।

पाप पुण्य का फैसला तो अब होना है।

गुजर हो जिसमें तेरी,अधिक तूम पाना न।

जोड जोड माया बेअर्थ तुम गबाना न।

बुरा बक्त ये आआ तुम घबराना न।

घर से बाहर भूल मत तूम जाना न।

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दुनिया में अब शुरू ये”मदन” छटनी हो गई।

उसकी नजर से न बच पाऐगा अब यहां है कोई।

तूम तो खुश हो यहां, वहां न कोई रोने बाला ।

कोई यहां है पाने बाला,कोई वहां है खोने बाला।

घर से दूर हुआ कोई,कोई भूखका मारा है।

किसी की आंख का तारा है,कोई चाँद सा प्यारा है।

सब अब हैं दूर हुए,मिलने को मजबूर हुए।

किस्मत बाले हो तूम तो,क्यों इतने मगरूर हुए।

हाल से बेहाल अब होना है,आगे देख क्या होता है।

अभी तो थोडा ही गया,देख आगे क्या खोता है।

यहां की माया यहां रहेगी,साथ कुछ तो जाना न।

बुरा बक्त ये आआ,तूम जरा घबराना न।

घर से बाहर भूत मत तुम जाना न

Stay Home,Stay Safe Be Happy😊😊Madan Bhau👌💞

👩‍⚖️मां तेरी याद बहुत सताती है👸

जब जब आंखें बन्द करुँ मैं।

तू तब तब याद मूझे आती है।

बच्चपन के सब सपने मेरे।

तू सपनों में बहुत रूलाती है।

मेरे गाँव की वो सुन्नी गलियां,घर आंगन।

तेरे हाथ की रोटियों की याद बहुत सताती है।

जब जब आंख बन्द करूँ मैं।

तू तब तब याद मूझे आती है।

👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️

तेरी बांहों का वो घेरा ।

बस संसार था इतना मेरा।

धुप सांव का रखवाला।

वो आंचल था मां तेरा।

उछल कूद कर थक हार कर तेरी गोद में।

सो जाना वो मधुर आबाज की लौरी।मुझे बहुत तडफाती है।

जब जब आंखें बन्द करूँ।

तू तब तब याद मूझे आती है।

👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸

नहीं भूला हुँ मां तेरा वो बलिदान।

नहीं भूल पाता मां तेरा वो त्याग।

सो सौ जन्म भी गर् ले लूं।

नहीं चुका पाऊगा तेरा एक भी हैशान।

खुद भुखे पेट सो कर तूने मां।

मेरे पेट को भरना,मेरी आंख छलक जाती है।

जब जब आंख बन्द करूँ।

तू तब तब याद मुझे आती है।

👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👸👩‍⚖️👩‍⚖️👸👸👩‍⚖️👸

मेरा रोम रोम तेरा र्कजाऊ है मां।

तेरे दुध की एक एक बुंद की गबाही है मां।

तुही मेरी सरजमीं तूहीं तो आस्मान थीं।

तेरे ही सांसों से मेरी चलती र्पवाहि।

जब देखता हुँ कहराते हुए,तुझे सपनों के बिस्तर पर।

तब तब आंख मेरी भर आती है।

जब जब आंख बन्द करुँ।

तू तब तब याद मुझे आती है।

👩‍⚖️👩‍⚖️👸👸👸👩‍⚖️👩‍⚖️👸👸👸👩‍⚖️

मां से बडा कोई संसार नहीं।

बिन मां सुखी परिवार नहीं।

मां है तो खिलती फुलवारी।

वरना माली का एतबार नहीं।

मेरा सुन्ना सुन्ना सा हो गया संसार।

छुटा जब से हाथ तेरा,वो नन्हें हाथों से।

तेरी उंगली को पकडने की याद बहुत सताती है।

जब जब आंख बन्द करूँ।

तू तब तब याद मुझे आती है।

👩‍⚖️👸👩‍⚖️👸👩‍⚖️👩‍⚖️👸👸👩‍⚖️👩‍⚖️👸

समय ने “मदन”बदली है कैसी करबट।

दौड रही है दुनिया सारी सरपट सरपट।

दरबाजे की चौखट पर खडी मां निहार रही।

आंखों में आंसुओं का सैलाब लिए हरपल।

टुटते हुए सपनों को बेसहाये संजोऐ जा रही है।

आंखों में तैरते सितारो की चमक बहुत कुछ कह जाती है।

जब जब आंख बन्द करूँ।

तू तब तब याद मुझे आती है।

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😊कुछ कर नहीं सकते😊

बहुत ज्जबात छुपे हैं दिल में मगर।

हम कुछ कह नहीं सकते।

ठुकरा दिया हमें सब ने।

जो अपना थे हमें कहते।

हम कुछ कर भी पाऐ ना।

हमारा मुक्कर ऐसा है।

कदम यहां यहां भी पडें।

रुसवाई बिखेर जाते हैं।

बहुत ज़्ज़बात छुपे हैं दिल में मगर।

कुछ कर नहीं सकते।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

मेरी परछाई दामन।

कभी न छोडती मेरा।

मैं यहां यहां भी चला।

वो साथ साथ चलती है।

मगर वो सब कहां गए।

जो कस्में खाते थे।

जिन्दगी भर का साथ निभाने की।

वौ कहीं ओर जा बसे हैं।

हम मगर यहीं ही रहते हैं।

बहुत ज़्ज़बात छुपे दिल में मगर।

कुछ कह नहीं सकते।

🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔

चले जाना तूम जब भी।

तूम्हें तो जाना ही है।

कुछ घडी ठहर जाते।

अभी क्यों जाना है।

हमारी मुहब्बत का सिला क्यों।

याद दिलाते हो..।

कहीं हम रो रो के बेहाल न हो जाऐं

जमाने की तन्हाइयों में।

“मदन”खोजोंगे कल फिर हमें।

बहती र्पुबाहियों में।

हम आज भी मुहब्बत का दम भरते हैं

बहुत ज़्ज़बात छुपे हैं दिल में मगर।

कुछ कर नहीं सकते ।

🌹🤔🌹🤔🌹🤔🌹🤔🌹🤔

🙏🙏

चन्न नी चढेया,रात अन्धेरी। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

चन्न नी चढेया रात अन्धेरी।

जाना किञां मैं दूर

ओ^^^जाना किञां मैं दूर।

माही यह मेरा दूर गै बसदा ओ..ओ..ओ

माही ये मेरा दूर गै बसदा।

मिलना ऐ जरुर हाय मिलना ऐ जरूर।

माऐ नी मेरिए जिन्द अकेली।

पौना ऐ पैल्लै पूर..

चन्न नी चढेया रात अन्धेरी।

जाना मैं किञां दूर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जम्मूऐै च मेरा रैन् बसेरा।

ओ..जम्मूऐै च मेरा रैन् बसेरा।

पहाड़े दी धारें च मन लग्गै मेरा।

नज़रां निमोनिया दूर गै लडियां।

नज़रां निमोनिया दूर गै लडियां।

मेरा नी कसूर होए,मेरा नी कसूर।

बाग बगीचे फूल खिडे् दे।

अम्भिऐं पेया बूर नी माऐ

अम्भिऐं पेया बूर…

चन्न नी चढेया रात अन्धेरी

जाना किञां मैं दूर…….

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अपने भी भूल्ले ,सज्जनें भुलाया।

अंखिऐं दें अत्थरू,मिकी रूलाया।

सुखने् नी होऐ चूर।

ओ.. सुखने नी होए चूर।

मैं प्रदेशन अज्ज यह होई।

थौ नी पुछदा ,मेरी ये कोई।

सारे ये होऐ अज्ज मगरूर।

माऐ नी मेरिए अंखियां ये लडियां।

लडियां न बडी दूर।

चन्न नी चढेया,रात अन्धेरी।

जाना किञां मैं दूर…..

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

निक्कडे फंगडूं,जिन्द निमोनी।

घरोन्दा छलैपा,सुरत नी रौनी।

उडना किञां मैं दूर।

ओ…उडना किञां मैं दूर।

“मदन”बेचारा अर्जा ये करदा।

मिली गै जाऐओ जरूर।

माऐ नी मेरिए,जिन्द अकेली।

पौना ई पैल्लै पूर।

माही ये मेरा दूर गै बसदा।

मिलना ई जरूर।

चन्न नी चढेया रात अन्धेरी।

जाना किञां मैं दूर……

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मत खोना अपना बिश्वास🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

देख तेरे उपवन की हालत🌹

क्या हो गई है भगबान🌹

एक दुसरे का है बना दुश्मन🌹

आज इस जग में इन्सान🌹

कहर क्या आआ जग में🌹

हो गई तेरे बन्दे की पहचान🌹

दूर भाग रहा है हर कोई किसी से🌹

क्यों न है खुल रही जुबान🌹

बाह रे कोरोना तूने क्या कमाल कर दिया।

पूरी दुनिया का हाल बेहाल कर दिया।

लगता है सुन्नी है अब यह धरती।

गरीबों को तो तूने कंगाल कर दिया।

हाथ हाथ से न छुए अब किसी का।

सब में दुरी का आलम नतीजा इसी का।

सुख चैन जो लूटा ,लूटा घरबार किसी का।

नफरत का जो बीज है बोता जा रहा।

विश्वास सभी का है खोता जा रहा

कहीं हो न इसका यूं असर।

बढ ना दूरियां इन्सान जो होता जा रहा।

बुरा बक्त कभी “मदन”थमता नही।

असर बुराई का अच्छाई में रमता नहीं।

खोना मत अपना बिश्वास साथियों।

रिश्तों पर यह कहर कभी जमता नहीं।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

तुं डर मुझसे,मैं हुँ कोरोना।

क्या खुब नजारा है मेरा।

जीना दुश्वर हो जाऐ गा।

मैं एक हवा का झोंका हुँ।

तालाश में ढुढूँ बस एक मौका हुँ।

यहां चाहुं जा सकता हूँ।

जिसको चाहुं पा सकता हुँ।

पहुंच जाता हुँ मै छुपते चुपके।

बच न पाऐ मूझसे कोई भी कोना।

तुं डर मुझसे,मैं हुँ कोरोना।।

🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄

इस धरती को आज मैने नर्क बनाया।

बाजारों में क्यों तूने है ताला लगाया।

आ जाता है पकड में जो भी मेरी

सुधबुध तब खो जाती है तेरी।

सुखी खांसी, तेज बुखार।

यही है तो मेरी पहचान।

मस्ती में हर देश घुम रहा हुँ।

हँस रहा हुँ मैं,आलम को है रोना।

तुं डर मुझसे, मैं हुँ कोरोना।

🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄

हर जगह हर एक के मुँह से।

मेरी ही बातें होती हैं।

दबोच रही है शीशु को माँ।

ले आंचल का छोर मुहँ में,बेवश मां रोती है।

नींद उडी है आंखों की अब।

न रात भर वो सोती है।

दहशत है मेरी इतनी।

बार बार वो हाथों को धोता है।

आदृश्य हुँ मै,पकड नहीं कोई पाऐगा।

स्वयं स्वच्छता रखो खुद को,बन्द करो रोना धोना।

तुं डर मुझसे मैं हुँ कोरोना।

🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄 🙄

मुँह को ढक कर,और स्वच्छ रहो तूम।

तब ही तो जान सच पाओगे।

भीडभाड से दूर रहो तूम।

न हाथ मिलाने पाओ तो।

हाथ जोड कर प्रणाम करो तुम।

यही धर्म निभाओ तो।

छु न सके कोई कोरोना तुम को।

फिर निडर तूम हो जाओगे।

स्वास्थ्य रहो तो फिर क्यों जीवन को खोना।

तुं डर मुझसे मैं हुँ कोरोना।

🙄🌹🙄🌹🙄🌹🙄🌹🙄🌹🙄🌹🙄🌹🙄🌹🙄🌹

🌹मगर य़कीन हमें होता नहीं था।🌹

सुनी थी बातें ये किस्से हजारों।

मगर य़कीन हमें होता नहीं था।

अजमाई जब हमने हकीकत।

खूदा की कस्म,आसूं आंखों से अब तो।

रूकने का नाम लेते नहीं थे।

चाहा था हमने जिन्हें दिल से।

यूदा जो कभी भी होते नहीं थे।

बदला है मौसम रंग फिजा़ में।

बहने लगे है दर्द के झरने।

ढुबने लगा इसमें मेरा हियां तो।

सुनी थी कहानी ये किस्से हज़ारों।

मगर य़कीन हमें होता नहीं था।

★★★★★★★★★★★★★★

बडी कस्में थीं खाईं, वास्ते दिए थे।

साथ छोडेंगे न अगले जन्म तक।

मगर साथ जन्मों का है दूर की बातें।

कुछ घडी तो साथ बिताई नहीं है।

क्यों बदले ये तेवर, बदली निगाहें।

नहीं भूल पाऐं तेरी रुसवाई।

सपनों में भी तूम न आते हो अब।

सताती नहीं अब तो तेरी युदाई।

सुख चूके हैं आंखों के सागर।

तस्वीर तेरी इसमें उबरती भी नहीं है।

सुनी थी कहानी,ये किस्सें हजारों।

मगर य़कीन हमें होता नहीं था।

★★★★★★★★★★★★★★★

भोली थी सूरत “मदन “तन से हसीं थी।

मन से भी तूं तो बहुत रगीं थीं।

खाऐ थे धोखें हरियाली यो समझी।

तेरे दिल की जो वस्ती, बन्ज़र जमीं थी।

बता ही तो देते,रूठने से पहले।

हम में आखिर क्या ये कमी थी।

दिल का लगाना दिल को तडफाना।

हम फिर कभी भी रोते नहीं थे।

सुनी थी कहानी,ये किस्से हज़ारों

मगर य़कीन हमें तो होता नहीं था।

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