🤔अब शाम ढलने को है🌚

अब शाम ढलने को है।

फडफडा रही है दीवे की लौ।

शान्त अति शान्त है बाताबरण।

सन्नाटा पसरा है चाहुँ ओर।

स्थिर हैं सांसे अभी।

निहारती आंखें शुन्य को।

नयी मंजल की तलाश में।

छुट रहे हैं एक एक कर के अरमान।

सुलझ रही है रिश्तों की उलझन।

तार तार खुल रहे हैं।

उलझे धागों की गाँठ।

नव स्फूर्ति, नव लालसा, नव तमन्नाओं।

का अंकुर फुट रहा है।

धुमिल से होते जा रहे हैं बीते पल।

शान्त है ह्रदय,तनावमुक्त है वदन।

नये सफर का आरम्भ अति सीघृ होने को है।

शेष पल हैं जिन्दगी के।

लेखा जोखा जो करना है र्कमों का।

समेट रहा है ,बाँध रहा है गठरी।

यादों की,र्कमों एंव कुर्कमों की।

जो साथ है ले जाने।

पाप पुण्य कर के माया है जो जोडी।

पाई भर भी साथ नहीं है जा रही।

बस यही हिसाब तो हो रहा है।

बेहहियत बन रही है अब।

अज़र बस्तुओं की।

लो बक्त आ गया है अब।

गमगश्ता हैं सब, रूदन के स्वर गुज़ रहे हैं

नम् हैं पलके,अपने परायों की।

जो बडी देर से प्रतीक्षा में हैं।

बस चन्द निशाँ रह जाऐंगे भुमिस्थल पर।

जो धुमिल से हो जाऐ गे कुछ ही पलों में।

कारवां बड जाऐगा आगे धीरे धीरे।

सांसे अब थमने लगीं हैं।

हवायों ने साथ छोड दिया है अब।

अन्धकार में डुब चुकी आँखें।

दुर आकाश में आशा की किरण की ओर बड् चुकी है रूह।नव जिवन की खोज में……….

👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏💓

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स्थिर आँखें

सिहरन सी कोंदतीं है तन मन में।😱

चिंगारी सी धधकती फिर वदन में😇

देखता हुँ मुर्झाया चेहरा,बोझिल पलकें🙋

स्थिर आँखें👁️ठहरे से लुटकते आंसू😱

जब बेवसी के चेहरे में उनके👁️

हलचल सी होती है मन के छोर में👌

प्रस्न उबरता है हिज़र ,क्या यही जिन्दगी है💃

उम्र सी गुजर जाती है💓

दुसरों के सपने संयोने में😇

जो दुःख के सिवा कुछ देते ही नहीं😘

क्यों घोटते हो गला् अपने अरमानों का👹

किस के लिए,क्यों कर जी नहीं पाते🙋

अपनी रंगीन,हशीन जिन्दगी के लम्हें💓

क्यों करः फिके रंगों का होता है चयन🏖️

क्यों हम खुश नहीं रह पाते🌋

क्यों भरी भरीं रहते हैं नयना🍲🐥

क्यों तुम दिन व दिन र्कज़ तले् दबते जा रहे हो🐼

कब तक आखिर ढोयोगे बेडौल, बेशुद्द,असहाय वदन को👥

जिस सहारे की तुम तलाश में जिवन खोते जा रहे हो👨‍👨‍👦‍👦

वो शायद मुमकिन ही नहीं मात्र कल्पना ही है⛑️

गर् यही है जिन्दगी,तो क्या जीना यारों🤶

तन्हाईयों में कटते पलो् का अहसास है हमें😿

उनकी बेरूखि,बेमुखि का अहसास है हमें😨

जान कर भी अन्जान रहते हैं हम🤢

शायद आज भी प्रवाह है उनकी हमें😵

इसी लिऐ चुप चुप से रहते हैं हम।🌹

स्थिर आँखों को इन्तजा़र है आज भी🐼

⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️⛑️

दुःख 😇सुख💓

यह दुःख और सुख तो,सच्चे साथी हैं।

हर मानव का यह साथ निभाते हैं।

पुरा जीवन यह कभी मिल न पाते हैं।

जब दुःख आता है,सुख दूर चला जाता है।

जब सुख आता है तो दुख दूर चला जाता है।

फिर चिन्ता करते क्यों,क्यों मुहँ छिपाते हो।

छिप छिप कर क्यों,दामन छुडाते हो।।।।

जब याद तुम्हें आती है,बिते हुए पलो् की।

फिर जीवन में भी,यह तुम्हें रूलाती है।

यह दुःख और सुख तो ,सच्चे साथी है।

😇😇😇😇😇😇😇😇😇😇😇😇

यह प्रेम की धारा तो,निश्चिल ही बहती है।

एक सन्देशा यह,हम को दे जाती है।

जब जीवन में तुम को ,दुःख न आआ तो।

जिन्दगी का तुम न लुत्फ़ उठाओ गे।

न सीखो गे कुछ तुम,न किसे सिखलाओ गे।

असल में यह दुःख ही हमें सिखलाता है।

कौन अपना है ,यह हमें बतलाता है।

फिर मन में क्यों करते हो,दुःख से क्यों डरते हो।

दुःख सुख की धारा तो,बहती ही रहेगी।

मौन खडी बहार ,कुछ न कहे गी।

ये दुःख और सुख तो,सच्चे साथी हैं।

💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓

जब आँख तेरी बन्द हो जाऐ गी।

दुःख सुख की परछाई भी साथ न जाऐगी।

यह यहीं के वासी हैं,अब तक के साथी हैं।

सब माया का मोह है,ये यहीं का तो है।

कुछ न ले कर आआ था,न ले कर जाऐगा।

जीवन के र्कमों का,तु बोझ उठाऐगा।

बस यही तो चीजें ,तेरे साथ जाती हैं।

मदन जीवन का तुम्हें,सार बतलाती हैं।

दुःख और सुख तो,सच्चे साथी हैं।

हर मानव का यह ,साथ निभाते हैं

दुःख और…………………………..

💓😇💓😇💓😇💓😇💓😇💓😇

👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌

तुम सा प्यारा ,तुम सा हशीन।#गज़ल#Tum sa payara,Tum sa hassen.

तुम सा प्यारा,तुम सा हशीन।

जग में दुसरा है ही नहीं।

तुम हो चन्दा, तुम हो तारे।

तुम हो पानी,तुम्हीं तो जमीं हो।

तुम से मुहब्बत,तुम से जहाँ है।

तुम हो कहाँ, और हम कहाँ हैं।

जलता तो होगा ,खुदा भी हम से।

देखता होगा तुम सा हशीन।

सोचता होगा मन ही मन में।

आना भी चाहता ,होगा करीब।

तुम सा प्पारा,तुम सा हशीन।

जग में दुसरा है ही नहीं।

आँखें हैं तेरी बहुत नशीली।

कोयल सी बोली, बहुत सुरीली।

चलते हो तुम जब वल खा कर् के।

थम सी जाती हैं,हवायें भी छल के।

काली घटाऐं जोरों से आऐं।

बालों की लट् जब खुल ही तो जाऐ।

तुम सा प्यारा,तुम सा हशीन।

जग में दुसरा ,है ही नहीं..।.

आग लगी है तन मन यारों।

मेघा ही अब तो प्यास बुझाऐ।

चाहा है तुम को,तुम को ही चाहें।

रोक सकें न अब फिजाऐं।

बाहों का घेरा,बांध लो बन्धन।

दूर न जाओ, आओ करीब।

मुझ को मिले हो बडे् नसीब से।

दूर न जाओ तुम देखो करीब से

तुम सा प्यारा, तुम सा हशीन।

जग में दुसरा है ही नहीं…….

##रोक लो कुछ घडी़##गजल#

रोक लो कुछ घडी़,दिल अभी भरा ही नहीं है।

तुम से दूर जाने का ,दिल अभी है तो नहीं।

ख्वावों में थे वो आऐ,घुंघट की ओट में।

देखा न जी भर के उन्हें,नहीं होश में था।

बुनता रहा रिश्तों के जाल को ,उम्र भर मैं।

बक्त ने कब ली करवट,अब तो वो जौश नहीं।

रोक लो कुछ घडी़ …………………….

आंखें हैं भरी भरी,दिल भी तो रो रहा है।

बिछोडे के गम को,बरसों से ढो रहा है।

अब करो न युदा यारों,दिल अभी भरा नहीं है।

संग मेरे आज ये ,आलम् भी रो रहा है।

जिन्दगी भर तन्हाईयों का ,दौर थमा नहीं।

मुक्द्दर है मेरा आज भी,सो रहा है।

रोक लो कुछ घडी़……………………

उनका मिलन भी, क्या मीलन हो गया।

बात करते नहीं वो कहाँ खो गया ।

आग तन में लगी तो,मन भी रो रहा है।

बीज़ नफरत के वो मन में, बो रहा है।

पास से गुजरे जब ,देखा तक नहीं।

क्या चाहत रखना भी,गुनाह हो गया।

रोक लो कुछ घडी़……………………..

जिन्दगी थम चुकी् कोई शोर नहीं है।

तेरे सिवाय मेरा ,कोई होर नहीं है।

चाहा था जी भर कर ,तुम को ही यारा।

तेरे सिवाय जिन्दगी का, कोई ठौर नहीं है।

अब भूल जाओ तुम,याँ अपना ही तो लो।

जो तुम से मुहब्बत है,वो किसी होर से नहीं है।

रोक लो कुछ घडी़,दिल अभी भरा नहीं है।

तुम से दूर जाने का, दिल अभी है तो नहीं।।

👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌

💓💓साजन है रूठा मेरा💓💓

सितारों मत मुस्कराओ,मेरे दिल में आग लगी् है।

साजन है रूठा मेरा मुझ से दूर बडी् है।

यारो तुम बहलाओ मेरा मन उदास रहता है।

चुप चुप ही रहता है,ये कुछ ना कहता है।

बारिश तुम बरसाओ फूल उनके आँगन में।

नाजुक हैं वो बडे्,नखरे हैं साजन मैं।

ओ माली चुनना न तुम फूल अभी।

सजाने हैं सपने मैने सावन में।

विहगम का शोरगुल परेशान कर रहा है।

तनहाईं में बैठे हम हैरान कर रहा है।

आंसू भी टपक रहे हैं,मन भी रो रहा है।

बेखर है मेरा साजन ,नींद में सो रहा है।

वायदे बडे्-बडे् किऐ थे,निभाना तो आया नहीं।

बेमुख से हो कर गुजरे,सुरत भी गँबारा नहीं

खोऐ ही रहते थे बातों में दिन रात जो।

मिलते नहीं अब वो,आते ही नहीं पास वो।

क्यों न फट जाती ये धरती मै इस में समा् जाऊँ।

उस ने क्या भुला है हमें ,मैं ही भूल जाऊँ।

कोईलिया मत छेडो़ राग तुम बिरहा का।

मन तडफता है बडा्, मेरी जान जाती है।

होठों पे हसीं को बरसों से हो गे हैं।

धुंधले से पड गे हैं,अक्सों में खो गे हैं।

बनाता हुँ तस्वीर मन की गहराईंयों में।

भर पाता नहीं रंग में मन की तन्हाईयों में।

सपनों में खोया सा दिन रात तडफता हुँ।

मन की बात अब किसी से न कहता हुँ।

वो खुशियां मना् रहें होंगे,हम मातम् मना रहे हैं।

बिरह की आग में हम दुखडा सुना रहे हैं।

सितारों तुम ही जाओ, उनको सन्देशा दे दो।

अंतिम सफर है अब तो,उनको भरोसा दे दो।

मिल न पाऐंगे अब हम तुम से जीते जी।

बहने दो आंसुओं को क्यों मन में पीते हो।

“मदन”जमीं भी यहीं होगी आस्माँ भी होगा।

बस हम ही न होंगे,बाकी निशाँ होगा।

सोऐ थे मुद्दत से,बो अब जाग रही है।

जिन्दगी तो मेरी देखो वो भाग रही है।

सितारों मत मुस्कराओं ,मेरे दिल में आग लगी् है।

साजन है रूठा मेरा,मुझ से दूर बडी् है।

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