मेरा दिल❤️है एक बंजारा।

मेरा दिल है एक बंजारा।

यूं फिरता है मारा -मारा।

गलियों में चौराहों में।

यु घुमे है बेचारा।

इसने सभी को चाहा मगर।

फिर भी न मिला सहारा।

समझ न सका यह फरेब तेरे।

करता भी क्या किस्मत का मारा।

मेरा दिल है एक बंजारा।

युं फिरता है मारा-मारा।

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मधुवन में फूलों ने चाहा।

यह उनके हाथ भी न आआ।

कलियों ने मुस्कराँ के देखा।

उनका साथ भी न पाया।

तितलियों ने उड कर माथा चुमा।

इसको यह रास न आआ।

घुमता रहता ठहरता नहीं यह।

यह है बहुत नाकारा।

मेरा दिल है एक बंजारा।

यूं फिरता है मारा-मारा।

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एक नहीं दो नही सौ बार है पुकारा।

साहिल में है डूब रहा मिला न कनारा।

खुदा ने अब तक बनाया ही नहीं।

जो इस को लगे प्यारा।

मस्त मलंग,शुफी मौला।

दुनिया से दूर बसेरा।

मैं बंजारा,दिल भी बंजारा।

“मदन “,रात भी अपनी अपना है उजियारा।

दूर हुँ महामाया से ईश्वर का है सहारा।

जैसे भी हो जाता है गुजारा।

मेरा दिल है एक बंजारा।

फिरता है मारा-मारा,फिरता है मारा मारा।

❤️❤️❤️💔💔💔💖💖💕💕💕

सौदागर हुँ खरीद लो गम बेचने आआ हुँ।

मेघा गरजे,मेघा बरसे बिन बरसात।

मध्यम हुआ उजाला घिर आई रात।

लहू ने लहू को क्यों ललकारा।

है आखिर किस बात की तकरार।

बर्षो की कठिन तपस्या का हश्र।

क्यों किया है तूने तार तार।

बोझ ऐैसा बडा गमों का।

सम्भाल न पाया हुँ

सौदागर हुँ खरीद लो ।

मैं गम बेचने आआ हुँ।

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सींचा एक समान बगीया के फूलों को।

एक समान झुलाया था झूलों को।

न बैर न बिरोध निगाहों में कभी।

फिर भी शिकायत क्यों शूलों को।

बिरह की दामनी में सुलगता हिजर।

कोसता मदं मदं भूलों को।

अपना हुँ तेरा पराया न हुँ।

सौदागर हुँ ख़रीद लो।

मैं गम बेचने आआ हुँ।

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दिन रात भटकता रहा राहों में हर राह।

मुड के गुजरती रही तेरी गलियों से।

ऐैसा उलझा राहों के जाल में।

फिर गिला् न रहा हमें रंग रलियो से।

बक्त कभी था अपना हुया करता अब मगर।

पिसता जा रहा हु बक्त की तलियों से।

आबरु लुट रही है ,लूटा रहा र्समाया हुँ।

सौदागर हुँ खरीद लो।

मैं गम बेचने आआ हुँ।

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बर्षो तरसा तू जिस हँसी को””मदन””

न हँसी मिली न सकुन मिला।

रुह की रूह से न हुई मुलाकात।

राहों में मशूमियत का हजूम मिला।

बोए होंगें शूल पथ पर किसी के।

बहारे खिजां जश्ने जनून खिला

कट लेने दो बहारों अन्तिम पल

अमन से दो घडी का बकाया यूं।

सौदागर हुँ खरीद लो।

मैं गम बेचने आआ हुँ।

बोझ ऐैसा बडा गमों का।

मैं सम्भल न पाया हूँ।

सौदागर हुँ खरीद लो।

मैं गम बेचने आआ हुँ।।

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😭😭😭😭😭😭😭😭😭

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महमाँ हूँ कुछ पल का। *****************

मैं तो महमान हूँ कुछ पल का।

ठहरुगां कुछ घडी फिर चला जाऊंगा।

चन्द पल प्यार के बिताने आआ हूँ।

फिर बहुत दूर चला जाऊंगा।

मैं तो महमाँ हूँ कुछ पल का।

ठहरुगां कुछ घडी फिर चला जाऊंगा।

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न नफरत के बीज़ दिल में तूम वो लो।

हम होना चाहते है सभी के तूम भी हो लो।

दूर जाना चाहता हूँ बुरी आलामत से।

मगर बन्धन से इस के कैसे छुट पाऊंगा।

भर लो आगोश मूझे कुछ घडी सुख चाहुगा।

मैं तो महमान हुँ कुछ पल का।

ठहरुगां कुछ घडी फिर लोट जाऊंगा।

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

आज मजबूर बहुत है दिल भी टूटा।

मूझे तो यारो,मेरे यारों ने ही लुटा।

समझ न पाया ,यह तो शैतान थे।

बडे ही जालिम ,हेसान-फरेमान थे।

मुझको ही लुटा मुझे बर्बाद किया।

छीना मेरा बच्पन,जबानी कैसे देख पाऊंगा।

मैं तो महमान हुँ कुछ पल का।

ठहरुगां कुछ घडी फिर चला जाऊंगा।

◆◆◆■◆◆◆◆■◆◆◆■◆◆◆

तूम क्या जानो कितना तडफां हुँ मैं।

सब की नजर में कितना.आखरां हुँ मैं।

रो लेता हूँ दिन में बीसों बार।

तन्हा तन्हा होता हूँ जभी मैं।

सोचता हूँ लूट चुका मेरा संसार।

कहा्ँ गया बच्पन जैसा प्यार।

क्या इस बेमौहब्बत जिन्दगी से लोट पाऊंगा।

मैं तो महमान हुँ कुछ पल का।

ठहरुगां कुछ घडी फिर चला जाऊंगा।

◆◆◆◆◆◆◆●●●●◆◆◆◆◆

मेरा दिल भी तडफता ,रोता है जार जार।

देखता हुँ बाबा की नम आँखो में उमडता प्यार।

अम्मा का उदास चेहरा,भाई बहन की फटकार।

ललचाई निगाहों से करने को बात।

मैं कभी भी तन्हा बैठू मूझे तन्हा न रहने दो।

बरणा बेमुर्तब जिन्दगी को न झेल पाऊंगा।

मै तो महमाँ हूँ कुछ पल का।

ठहरुगां कुछ घडी फिर चला जाऊंगा।

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

हो जाए गलती कभी अन्जाने में।

तूम सब दिल में मत लगाना।

मैं होश में नहीं ये हो जाता.है।

बायदा है फिर न कभी गुस्ताखी करुगाँ।

सम्भाल लो कुछ घडी मूझे बायदा है मेरा।

मैं लोट आऊं गा,मैं लोट आऊंगा।

मैं तो महमाँ हूँ कुछ पल का।

ठहरुगां कुछ घडी फिर चला जाऊंगा।

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

जीना है अभी मदन मूझे बहारों मैं।

जीना है मुझे अभी नाजारों में।

जीना है अभी मुझे करारो में।

जीना है अभी मूझे दुलारों में।

भटका हूँ राह मगर.भूला नहीं हुँ।

याद है मुझ को बायदा भी निभाऊंगा।

मैं तो महमाँ हूँ कुछ पल का।

ठहरूंगा कुछ घडी फिर न लोट पाऊँगा।

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💔मन न जलाया करो💔🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥

तन को तो जलाया है मगर

मन को जलाया न करो।

क्यों हो दूर इतने हम से

कुछ हमें भी बताया करो।

तन को जलाया है मगर

मन को जलाया न करो।

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रूस्वाई है हम से तूम्हें

जिंदगी से रूठो न मगर

चैन से तूम भी रहो

चैन से हम को रहने दो।

कोई तो रिस्ता निभाया करो।

तन को है जलाया मगर।

मन को जलाया न करो।

********************

रहा न मोह अब जिन्दगी से हमें।

मिली फुर्सत न दिल्लगी की हमें।

हम ने जब से है होश सम्भाला।

इस ने बहुत है तडफाया हमें

तन को है जलाया मगर।

मन को जलाया न करो।

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हमारे रहमो- कर्म को तूम।

इतना भी न अजमाओ।

लाचार हैं बेशक हम मगर।

इतने भी मजबूर नहीं हैं।

बेबजह हम को सताया न करो।

तन को है जलाया मगर।

मन को जलाया न करो।

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क्या क्या नहीं” मदन”हम ने।

गम उठाए हैं अब तलक।

रो पडे है संग आस्मां और फलक।

जख्म हैं हरे हरे,इन्हें न दुखाया करो।

तन को है जलाया मगर।

मन को न जलाया करो।

क्यों हो दूर इतने तूम।

कभी पास आया करो।

तन को है जलाया मगर।

मन को जलाया न करो

💔🙏💔🙏💔🙏💔🙏💔🙏

मुस्किल सही कट तो जाऐंगी राहें।

मुस्किल सही, कट तो जाऐंगी राहें।

भरते हो क्यों जी,ठण्डी आहें।

अकेले हैं हम तो कोई बात नहीं।

रब्ब है साथ ,अगर कोई साथ नहीं।

किसी के लिए क्यों दिल को जलाऐं।

मुस्किल सही,कट तो जाऐंगी राहें।

जुल्मों सितम हमपे कितने किए हैं।

बेहद दर्द भी हमको दिए हैं।

हम ही आखिर क्यों ये रिस्ते निभाऐं।

मुस्किल सही कट तो जाऐंगी राहें।

तन्हा तन्हा,रफ्ताँ रफ्ताँ चल रहा हूँ।

मंजिल है दूर फिर भी बढ रहा हूँ।

हजारों गम् चाहे खडे फैला बाहें।

मुस्किल सही कट तो जाऐंगी राहें।

क्या गुनाह किया ,धरती का ईंसान बन के।

क्यों सहमें सहमें जीते रहे डर डर के।

हम ही आखिर क्यों जी तडफाऐं।

मुस्किल सही,कट ही तो जाऐंगी राहें।

असां नहीं ”मदन,”सफर यहाँ ।

बस करले तू थोडा सबर यहाँ।

चल पड तू लेकर बोझल निगाहें।

मुस्किल सही,कट तो जाऐंगी राहें।

भरते क्यों हो जी,ठण्डी आहें।

मुस्किल सही,कट तो जाऐंगी राहें।

😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭

💕तूम कब.आओगी।💕

नज़रे बिछाऐं बैठे हैं,तूम कब आओगी।

फलक से आसमान तक,हम सजाए बैठे हैं।

Tum kab Aaogiiii

नजरें बिछाऐं बैठे हैं तूम कब आओगी।

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दिल बना एक सितारा, जो चमक उठा है।

आँखें दरबाजे से निहारती हैं राहें तेरी।

याद से तूम मेरी न जा पाओगी।

नजरें बिछाऐं बैठे हैं,तूम कब आओगी।

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मेरी नन्ही सी परी,मेरे सपनों की शहजादी।

तूम बेटी ही नहीं मेरी रूह की हो आबादी ।

जिगर से दूर करना,गुवारा ही नहीं।

आना है कब तूम्हें,यह कब बताओगी।

नजरें बिछाऐं बैठे हैं, तूम कब.आओगी।

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तन्हा मन नहीं लगता है तूम जीने का जरिया हो।

जिन्दगी निभाने का तूम ही नजिरिया हो।

इतना मजबूर तूम अभी करो न हमें।

बात कुछ ऐैसी हो जिस में तेरे आने की खबरिया हो।

दिल कुछ ऐैसे टुटा के छुने से बिखर जाऐ।

बिखरा हुआ जमीं पर तूम इसे पाओगे।

नज़रे बिछाऐं बैठे हैं तूम कब आओगे।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■चलो ‘मदन”आखिर तूम आ ही गए।

ये दोर कैसा है आआ।

तूम सामने हो मेरे।

मिल तूम से सकते नहीं।

मजबूरी रीत निभाने की फिर।

तन्हा तूम रहना।

तन्हा हम रह लेगें।

कुछ दिन में यह मौसम फिर बदल जाऐगा।

होगी बरसात मिलन की आसूँ उमड आऐगें।

फिर मिलके हम खुशियां मनाऐं गे।

हो बायदा कि न फिर लोट जाऐगी।

नजरे बिछाऐं बैठें हैं तूम कब आओगी।

तूम कब आओगी

तूम कब आओगी। 🌹 Madan🌹

■■★★■■★★■■★★■■★★

👌चेहरा क्या देखते हो👌

अभी क्या देखते हो चेहरा मेरा।

कुछ दिनों बाद देखोगे पहरा मेरा।

ऐैसी आन्धी आएगी बुखार की।

मिट जाएगी दूरी रब्ब और तेरे प्यार की।

हालत ऐसी कर दुंगा में।

हसती ही मिट जाएगी संसार की।

तरसे गा तू घर से निकलना।

बीत जाएगी रूत बहार की।

खुब खेला है तू कूदरत से।

अब बारी है कूदरत की मार की।

बहुत चेताया, बहुत समझाया तूझे।

पर तू न जाना धार तलवार की।

बिछाता चला गया राहों में कांटे।

हद ही हो गई तेरे खुमार की।

उजाडे तूने लाखों हैं घर-वार।

नहीं सुनी चीख गरीब परिवार की।

तेरे पापों में अब पीसेंगे र्निदोष भी

अगर आज भी न तूने गलती स्विकार की।

सवनम की बूँदों की तरह तेरी जिन्दगी।

कभी चोट खाई जमीं की कभी पहाड की।

अभी तो बहुत गम सहेगा तूं।

यह तो शुरूआत है मेरे संहार की।

खिल जाऐंगे कमल की तरह कुछ।

न छोडी लडी जिसने पालनहार की।

चक्षुओं को खोल दौडा नज़र बाहर भी।

क्या हालत कर दी मैने बाजार की।

मैं इतना भी कमजोर नहीं जो तू समझा।सर्वोपरि हुँ में बात नहीं हँकार की।

कर सकता है मजा जितना करले तूं।

मना ले खैर पहले परिवार की।

फट जाएगा, मिट जाऐगा बीज जहर वो दिया।

लाना तामील में बात मेरे हूंकार की।

रिक्त होगा एक दिन धरती का कोना कोना।

अगर तूम नहीं सम्भलें ‘”मदन”‘

सम्भालूंगा मैं तूम्हें।

मेरा नाम है कोरोना

कोरोना कोरोना कोरोना

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बातें चार कर लें।।

चलो हम तूम कुछ घडी मिल कर।

बातें चार कर लें।

कल सब कुछ ठीक होगा।

हम कैसे एतवार कर लें।

ये आन्धीं जो गमों की है आई।

कब किस का संहार कर ले।

चलो कुछ घडी मिल के ।

बातें चार कर लें।।

**********************

खुद को खुद में भी सिमट के देख लिया।

घर में कैद हो कर भी हमने देख लिया।

सब रिश्तों से खफा हो कर भी देख लिया।

दिल पर पत्थर रख कर,आसुओं को टपका कर भी देख लिया।

जितने हम इससे डरते रहे।

ये हमें और डराता चला गया।

सैंकडों से आज हम लाखों में हो गे।

कितने रब्ब को प्यारे हो गे।

कब कौन इसकी लपेट में होगा।

चलो हम अपना भी इन्तजार कर लें।

चलो कुछ घडी मिल के।

हम तूम बातें चार कर लें।।

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चन्द दिनों में ही इसने क्या हाल कर दिया।

पूरे संसार को ही कंगाल कर दिया।

सुख चैन से जीते थे जो कभी।

उनका जीना दुश्वार कर दिया।

बहुत नाचे सब कुछ दिन तो।

अपने हाथ खडे अब सरकार कर दिए।

छोड दिया फिर हमें रब्ब भरोसे।

चलो हम खुद ही इस से आँखें चार कर लें।

चलो कुछ घडी हम तूम मिल के।

बातें चार कर लें।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹💕💕💕💕मदन💕💕💕💕■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

🌹🌹अब तो बदल चुकी सरकार।🌹🌹

हसरतें,तमन्नाएं दबा कर रखना।

अब पूरी न हों पाऐंगी यार।

तेरा जमाना नहीं है अब।

कोई न सुने का तेरी पुकार।

अब तो बदल चूकी सरकार।

******************

छुप छुप कर रोना बन्द कर दे तू।

बचा कर रखना चश्में नजर तू।

तन्हा होगा वहा लेना इन्हें तब।

निकाल लेना तू दिल के गुबार।

अब तो बदल चुकी है सरकार।

********************

तेरी नहीं चलने बाली अब।

अपनी नसीहत मत देना।

मिल जाऐ रूखी सुखी जो भी।

चुपचाप इसे गटक लेना।

अपनी फरयाद की मत करना गुहार।

अब तो बदल चुकी है सरकार।

*********************

कदम लडखडाऐं तेरे हो घुटन महशूस।

चुपचाप सह लेना पीढा रहना महफूज।

आंसू न तेरा भूल से भी गिरने पाऐ।

मत बहने देना इनको बे-फजूल।

दरौहर हैं यह तेरे बुढापे की है ये बहार।

अब तो बदल चुकी है सरकार।

*******************

तेरे जमाने के लोगों के दिल में गुबार न थे।

अनपढ थे वो मगर गबांर न थे।

ख्बाहिसें बहुत सीमित थीं उनकी।

युहीं बेबजह किसी के सर पर सबार न थे।

अब नश्ल बदल चुकी है हैं बदले बदले घर-बार।

अब तो बदल चुकी है सरकार।

***********************

जमाने भर की बातें,लोगों से सुनकर आते हैं

रिश्ते तो उनको फुटी नजर न सोहाते हैं।

घर के राज तो गैरों से हैं खोल देते।

कुछ कहो उन से तो आगे हैं बोल देते।

चुपी में है भलाई इसी की है दरकार।

अब तो बदल चुकी है सरकार।

********************

चल रहे हैं जब तक कदम,जीवनसंग को सम्भाल लना।

बुढापे का सहारा है”मदन”मिलकर आंसु बाँट लेना।

तूम उसमें खोना वो तुझमें खो कर बक्त काट लेना।

यह लडी न टुटने पाऐ,मिल कर दुःख सुख खँगाल लेना।

हो अगर कोई वेटी तो उसे सम्भाँर देना।

जब होगें तन्हा तूम वो ही आऐगी बन के बहार ।

अब तो बदल चुकी है सरकार।

*********************

खाना तो सभी को आता है।

अजि खिलाने की अदा सीख लिजिऐ।

पुश्तों की दौलत उडाना तो सभी को आता है।

पहले दौलत कमाना तो सीख लिजिऐ।

माना के मौसम बदल चुका ,है तो बही पुरबाज।

अब तो बदल चुकी है सरकार।

🌹🌹🌹🌹नमस्ते🌹🌹🌹🌹

धीरे धीरे बक्त की वेला फिसल जाऐगी।

बडा मुस्किल मगर ,न मुमकिन नहीं है।

यह तो बक्त की करवट है।गुजर जाऐगी।

तन्हा न समझ तू सब साथ हैं।

यह दुख की घडी भी धीरे धीरे फिसल जाऐगी।

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तूम होसला बनाऐ रखना।

न डगमगाने पाऐं तेरे कदम।

कुछ घडी और आराम कर लें।

धीरे धीरे बक्त की वेला फिसल जाऐगी।

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जब इन्सान ही जमीं पर नहीं ठहर पाया।

यह बक्त क्या है ..ये भी गुजर जाऐगा।

इम्तहान तेरा ले रहा है खुदा।

देखना कल की सुबह सुख का सुर्य निकल आऐगा।

यह.बक्त भी धीरे धीरे फिसल जाऐगा।

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माना कुछ अटपटा सा लग रहा है।

माना कुछ असहाय सा लग रहा है।

मानो अपनो से दूरी का दर्द है।

कल फिर मिलेंगे ऐसा लग रहा है।

यह.घडी भी गुजर जाऐगी।

यह बक्त भी धीरे धीरे फिसल जाऐगा।

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दूरियां कुछ देर के लिए हैं।

चेहरा नकाबों में कुछ घडी के लिऐ है।

तेरे मजबूत इरादों के सामने।

यह कहां टिक पाऐगा।

यह बक्त भी धीरे धीरे फिसल जाऐगा।

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मत भटको राहों में तूम यारो।

तुम्हें तो हम सम्भाल ही लेगें।

क्यों उजाडे हैं अश्याने तूने।

मायूस चेहरे फिर से खिलेंगे।

रूत बहार की फिर आऐगी।

यह बक्त की वेला भी धीरे धीरे फिसल जाऐगी।

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माना कठिन है बसर करना।

गाडी जिन्दगी की रूक जाऐगी।

रही जिन्दगी अगर सलामत तो।

यह स्थिति भी सम्भल जाऐगी।

आस को दुर्बल मत होने देना।

दो बक्त की रोटी तो मिल जाऐगी।

यह मोह माया,मदन,यही का खेल है।

देखना कल फिर तेरी नियत बदल जाऐगी।

यह बक्त की वेला है धीरे धीरे फिसल जाऐगी।

***********मदन****************************भाऊ*